31.12.04

हग 3.1 बेटा

अगला क्या है, हग 95 बेटी?

2 टिप्‍पणियां:

  1. आलोक, क्या बात है...
    छींटाकसी.. हमें ऐसे ही नए शब्दों की तलाश रहती है... हमेशा.

    काश आप गनोम केडीई के रीव्यू वर्कशॉप में समय निकालकर दिल्ली पहुँचते तो शायद हिन्दी लिनक्स की बात कुछ और होती...

    रवि

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  2. मुझे भी दुःख है कि रविकान्त जी द्वारा दो बार बुलाने पर भी मैं दोनो में से किसी साल जा न पाया। एक बार शादी का मामला था, दूसरी बार विदेश में था पर अभी भी समय है। उम्मीद है कि अगली बार ज़रूर आ पाऊँगा।

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