23.12.04

एक दिन में एक शेयर

यह पसन्द आया, अपनी बत्ती लगने के बारे में : ये धुआँ कम हो तो पहचान हो मुमकिन, शायद यूँ तो वो जलता हुआ, अपना ही घर लगता है

1 टिप्पणी:

  1. जनाब नसरूद्दीन पान की दुकान पर पान खा रहे थे कि पंडित बैजूनाथ चिल्लाते हुए आये
    "आग लग गयी मोहल्ले में, और तुम चैन से पान खा रहे हो"
    जनाब नसरूद्दीन ने कहा "मैनू की?"
    पंडित बैजूनाथ चिल्लये "अरे तेरे घर में भी लगी है आग!"
    जनाब नसरूद्दीन ने कहा "तैनू की?"
    नोट: अगर पंजाबी का प्रयोग कुछ गलत हो गया हो तो आलोक या पंकज ठीक कर दें कृपया|

    उत्तर देंहटाएं

सभी टिप्पणियाँ ९-२-११ की टिप्पणी नीति के अधीन होंगी। टिप्पणियों को अन्यत्र पुनः प्रकाशित करने के पहले मूल लेखकों की अनुमति लेनी आवश्यक है।