21.6.05

बैठ गया

कम से कम परम वालों से तो कुछ बेहतर होने की उम्मीद थी। पर वो तो कहेंगे कि दूसरा विभाग है। पर उम्मीद में नौ दो ग्यारह होते हैं। दुनिया कायम है तो हम भी करेंगे।

1 टिप्पणी:

  1. पहुँच गया अन्दर - कमाल का भण्डार है। जय सीडॅक। आज भी चैन की नींद आएगी।

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