28.10.07

आ गई मैशियत

श्रीश की बदौलत। वैसे अभी तक हम दोनो को ही समझ नहीं आया है कि यह है क्या। यदि आपको न्यौता चाहिए हो तो लिखें। शुक्रिया, श्रीश

3 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ दाम भी भेजने हैं क्या :)

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  2. ठीक किया, और यह भी समझ आ गया कि कल आपका डाक पता क्यों नहीं मिल रहा था। हम समझें न समझें, गूगल तो और में फ़र्क समझता है )

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