30.5.08

डोमेन तो ठीक है, पर ये सीनेम क्या है? अपने डोमेन पर ब्लॉगर.कॉम वाला चिट्ठा चढ़ाने के बारे में थोड़ा और विस्तार से

पिछले लेख में अपने डोमेन पर ब्लॉग्स्पॉट.कॉम वाले चिट्ठे को चढ़ाने के बारे में जो टिप्पणियाँ आई हैं उससे लगता है कि अब बहुत लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखते हैं।

पिछले लेख में कुछ लोगों को यह नहीं समझ आया था कि पहला कदम - डोमेन खरीदना - और तीसरा कदम - ब्लॉग्स्पॉट को डोमेन के बारे में बताना - के बीच में क्या करना है। मुझे भी पहली बार नहीं समझ आया था। अमित और विपुल ने इस मामले में शुरुआत में मेरी काफ़ी मदद की थी, तो अब वही जानकारी विस्तार से आप लोगों के लिए।

जब आप डोमेन खरीदेंगे तो आपको एक कड़ी दी जाएगी जिसमें अपने डोमेन से संबंधित कुछ बदलाव - जैसे नाम, पता, डाक पता आदि - करने की सुविधा होती है। उसी में एक विकल्प है नेमसर्वर बदलने का।

अगर आप आतिथ्य - होस्टिंग - भी खरीदते हैं तो आपको अपने होस्ट का नेमसर्वर यहाँ लगाना होगा, लेकिन हमें इस काम के लिए होस्टिंग नहीं चाहिए, होस्टिंग तो ब्लॉगर.कॉम वाले ही कर रहे हैं, वह भी मुफ़्त में, हमारा तो सिर्फ़ नाम है - इसलिए हमें अपने नाम के लिए एक एलियास बनाना होगा - यानी meranaam.in बनाम गूगल।

इसी बनाम करने की प्रक्रिया को CNAME बनाना कहते हैं।

CNAME जोड़ने का एक तरीका यह है -

  1. http://zoneedit.com में एक खाता खोलें। खाते में वही डाक पता दें जो आपने डोमेन पंजीकरण के समय दिया था। इससे ज़ोनएडिट को पुष्टि होगी की आपका ही स्थल है।
  2. यहाँ पर अपने खरीदे हुए डोमेन को एक ज़ोन बना दें। यह बनाने के बाद ज़ोनएडिट बताएगा कि आपको अपने डोमेन के नेमसर्वर में किन दो नेमसर्वरों के नाम डालने हैं।
  3. अपने डोमेन प्रदाता की कड़ी पर जा के ज़ोनएडिट वाले नेमसर्वर वहाँ प्रदान कर दें।
  4. इसके बाद, एलियास जोड़ दें, जैसे मैंने एक स्थल के लिए जोड़े हैं - काले वाले हिस्से में meranaam होगा - आपके डोमेन का नाम। अगर आपके कई चिट्ठे हैं तो आप कई CNAME जोड़ सकते हैं, अगर एक ही है और उसका नाम meranaam.in ही रखना चाहते हैं तो meranaam के पहले कुछ लगाने की ज़रूरत नहीं है। यह करके इसे सँजो लें। ज़ोनएडिट

बस हो गया काम।

अब, जब भी कोई आपके स्थल पर जाने की कोशिश करेगा, तो पहले आपके डोमेन के नेमसर्वर पढ़े जाएँगे। पता लगेगा कि यह तो ज़ोनएडिट के हैं, ज़ोनएडिट फिर एलियास की बदौलत पाठक को सही जगह भेज देगा, लेकिन आपके स्थल पर यूआरएल में डोमेन आपका ही दिखेगा। ज़ोनएडिट की सेवा बिल्कुल मुफ़्त है।

वैसे तो कुछ डोमेन प्रदाता भी इस प्रबन्धन की सुविधा देते हैं - ताकि ज़ोनएडिट पर जाना न पड़े। डोमेन प्रदाता द्वारा दी कड़ी पर सत्रारंभ करके एक बार देख लें कि ऐसी सुविधा वही दे रहा है क्या - तो काम और आसान हो जाएगा।

अगर आपको ज़्यादा कुछ समझ न आया हो तो कृपया पहले पिछला लेख पढ़े लें।

उम्मीद है आप लोग दाल चावल अलग कर पाएँगे अब। अगर नहीं तो लिखें! अब हमें है दफ़्तर जाना, हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

4 टिप्‍पणियां:

  1. ये हुयी न काम की बात। अब बाकी बात डोमेन नेम मिल जाने पर करेंगे। कल खरीदने का ऑर्डर प्लेस कर दिया है।

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  2. रूपेश के लिए लड़कियां सप्‍लाई करने वाला है यशवंत
    सावधान हिंदी चिट्ठाकारों, नहीं तो जाल में फंस जाओगे

    ये समाचार है रूपेश श्रीवास्‍तव के बारे में. जनाब मुंबई में रहते है और पिछले कुछ सालों में अचानक इनके पास खूब सारा पैसा आ गया है. इनका मुख्‍य धंधा है रंडियों की दलाली. ये मुंबई के कुछ बड़े लोगों के पास लड़कियां सप्‍लाई करने का काम करते हैं. पिछले दिनों बड़े पैमाने पर बार डांसर बेरोजगार हो गईं, तो रूपेश ने इस व्‍यवसाय से जुड़ी लड़कियों का एक ग्रुप बनाया, जिसको वो बड़े लोगों के लिए सेट करता है. एक लड़की को एक रात किसी के पास भेजता है, तो 40 परसेंट कमिशन लेता है.

    इस शख्‍स को इस धंधे का चस्‍का तब लगा, जब ये चाल में रहने वाली वेश्‍याओं के गुप्‍त रोगों का इलाज करने लगा. इधर कुछ दिनों से इस आदमी का व्‍यवसाय मंदा पड़ रहा है. अब इसने हिजड़ों का सहारा भी लेना शुरू किया है. अभी बॉम्‍बे में बड़े पैमाने पर गे-समूह काम करता है, जिसके बीच रूपेश श्रीवास्‍तव हिजड़ा सप्‍लाई करता है.

    पिछले दिनों भड़ास का मुख्‍य मॉडरेटर यशवंत मुंबई गया, तो रूपेश श्रीवास्‍तव ने हर रात उसे एक लड़की के साथ सोने का मौका दिया. करार यही हुआ कि दिल्‍ली से कुछ लड़कियों को बॉम्‍बे इस काम के लिए यशवंत भेजा करेगा. यानी रूपेश को अपना रैकेट फैलाने के लिए यशवंत एक मजबूत दलाल नजर आया.

    यशवंत ने दिल्‍ली आकर रूपेश के प्‍लान के मुताबिक भड़ास फॉर मीडिया खोला है. इसके जरिए यशवंत उन लड़कियों को फंसाने वाला है, जो पत्रकारिता में संघर्ष कर रही हैं.

    पिछले दिनों अपने दोस्‍त की जिस बेटी से उसने बलात्‍कार की कोशिश की, तो योजना यही थी कि बलात्‍कार के बाद उसे ब्‍लैकमेल करके किसी तरह बॉम्‍बे भेजता और इसके बदले में रूपेश उसे 85 हजार रुपये देता. लेकिन लड़की भाग खड़ी हुई, और खिसियानी बिल्‍ली की तरह यशवंत अब खंभा नोंच रहा है. उल्‍टा पुलिस-मुकदमा का चक्‍कर हो गया, सो अलग.

    लेकिन मैं हिंदी ब्‍लॉगरों को सावधान करना चाहता हूं कि भड़ास के इन भे‍ड़‍ियों से बचें और इन्‍हें हिंदी चिट्ठाकारी से खदेड़ दें।

    आने वाले दिनों में हम हिंदी चिट्ठाकारी से जुड़े कुछ और खुलासे भी करेंगे, जिनमें बोधिसत्‍व की कुछ कारगुज़ारियां भी शामिल हैं कि कैसे मुंबई के सी ग्रेड सिनेमा बनाने वालों के लिए ब्‍लू फिल्‍म लिख कर इसने पैसे कमाये. और कैसे इसने अपने युवा दिनों के दोस्‍त की प्रेमिका पर हाथ साफ़ किया और कितनी निर्दयता से अपने प्रेमी से बेवफाई करके वो बोधिसत्‍व की बीवी बन गयी.

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  3. 'इसके बाद, एलियास जोड़ दें' एलियास जोडने की सुविधा रेडिफ एवं जोनएडिट दोनों में दिया है तो क्‍या यह एलियास रेडिफ में जोडे या जोनएडिट में । कृपया बतावें tiwari.sanjeeva@gmail.com

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  4. छत्तीसगढिया जी,
    अगर आपने ज़ोनएडिट के नेमसर्वर का इस्तेमाल किया है तो ज़ोनएडिट पर ही एलियास डालें।

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