30.7.07

सैल गुरु

यूँ तो वैसे ही घर बार से सम्बन्धित हिन्दी में जालस्थल बहुत ही कम हैं, अतः सॅल फ़ोनों व उनके सहायक उपकरणों से सम्बन्धित स्थल देख कर खुशी हुई। अक्सर दुकानों में जाने पर यह पूछने पर कि इस फ़ोन में हिन्दी है क्या? पहले तो लोग ऐसे घूरते थे जैसे कि लङ्गूर हूर खोज रहा हो, अब कम से कम दुकानदार लोग डब्बा अलट पलट के बता देते हैं, लेकिन फिर भी कई दुकान वाले डब्बा खोलने से इन्कार कर देते हैं अतः यह पता ही नहीं लग पाता कि फ़ोन में हिन्दी है या नहीं, और है तो किस हद तक। वैसे यह स्थल सामूहिक चिट्ठा भी बन सकता है, अब किसी भी एक व्यक्ति के पास सभी फ़ोन तो नहीं होंगे। पता नहीं ब्लॉगर में मध्यस्थता की सुविधा है या नहीं। वैसे टिप्पणियों में लिखा है कि हिन्दी की सुविधा के बारे में भी जानकारी दें।

8 टिप्‍पणियां:

  1. सही है। बनाओ समूह ब्लाग!

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  2. एक और बात पर दुकानदार लंगूर समझ बैठता है. अगर उससे कहें कि मेड इन इंडिया चाहिए तो वह इतनी घृणा से देखता है कि कहां से आ गया यह थका हुआ आदमी.

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  3. मेड इन इंडिया चाहिए

    हाँ, क्योंकि मेड इन इंडिया में सेवा, वारण्टी, गारण्टी सब कुछ देनी पड़ेगी। मेड इन इण्डिया और बिना मेड इन इण्डिया के दाम में तो ज़्यादा फ़र्क है नहीं। हर रोज हर दुकान पर दस बारह लोग यही माँग करेंगे तो ये अपने आप सुधर जाएँगे।

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  4. भारत में निर्मित सैल-फोन कौन कौन से बताएं.

    बाकि हिन्दी वाली बात सही. फिर माँग बढ़ेगी तो हिन्दी पर चल्ने वाले फोन भी ज्यादा आएंगे.

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  5. भारत में निर्मित सैल-फोन कौन कौन से बताएं
    वास्तव में देखा जाए तो कोई नहीं हैं, इस सन्दर्भ में मेड इन इण्डिया से अभिप्राय है सेल फ़ोन कम्पनियों के भारतीय दफ़्तरों द्वारा बेचे जा रहे उन्हीं के विदेशों में बने फ़ोन। आमतौर पर इन फ़ोनों पर गारण्टी, वारण्टी आदि होती है, और हिन्दी की सुविधा भी पाई जाती है।
    वैसे तो नोकिया ने चेन्नई में अपना कारखाना खोल लिया है, लेकिन शायद वहाँ से अभी पहला फ़ोन निकला नहीं है।

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  6. हां जी ये हिन्दी की बात पता करना बड़ा मुश्किल काम है। अभी स‌ृजनशिल्पी जी का नोकिया 5700 देखे थे, क्या मस‌्त हिन्दी दिखती है उसमें। स‌ब फ्लैट हो गए थे।

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  7. सैल गुरु ब्लॉग एक अच्छी पहल है. वहीं पर सुझाव एवं प्रतिक्रियायें देकर उसे और उन्नत बनाया जा सकता है.

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  8. नये-2 सेल की जानकारी दें… अच्छा प्रयास लग रहा है…।

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