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15.12.08

अमरूद खाते खाते वापस

लौट रहा हूँ, गाड़ी चार घंटे लेट है, शायद ज़्यादा भी। आज का दफ़्तर तो ठप्प ही समझो। इलाहाबाद में प्रमेंद्र जी से मुलाकात हुई, उन्होंने कुल्हड़ वाली चाय पिलाते हुए चंडीगढ़ आने का मेरा आमंत्रण स्वीकारा। पता चला कि मेरे ससुराल वाले और प्रमेंद्र जी का इलाका एक ही है।

दस साल बाद इलाहाबाद जा के मज़ा आया। आशा है अगला सफ़र जल्द हो। लेकिन इस लेट लतीफ़ ऊँचाहार एक्स्प्रेस से नहीं। लेट लतीफ़ शब्द की उत्पत्ति के बारे में सोच रहा था, कि लेट शब्द का जन्म होने/उसके स्वीकार्य होने से पहले लेट लतीफ़ों को क्या कहा जाता था? पर शायद कुछ नहीं, समय से आना एक पाश्चात्य, पूँजीवादी गुण है। क्या विचार है आपका इस बारे में?

इस बार इलाहाबाद में अपने रिश्तेदारों में ग्राम निवासी, शहर निवासी व महानगर निवासी, तीनो प्रकार के रिश्तेदारों से मिला, उन्हें आमने सामने देखा। स्पष्ट था कि आर्थिक समृद्धि महानगर वालों तक ही केंद्रित थी। अफ़सोस हुआ, कि एक जीवनशैली का अंत हो रहा है, धीरे धीरे।

अमरूद अच्छे हैं।

12.12.08

आ रहा हूँ अमरूद खाने

कहाँ? वहीं, जहाँ के मशहूर हैं! हो सकती है मुलाकात, तो बढ़िया हो। वैसे जाना मुझे उसी -पुर में है जिस -बाद में वह है। इस शनिवार और इतवार। तेरह दिसंबर की दोपहर से १४ दिसंबर की दोपहर के बीच।


इससे बड़ा नक्शा देखें

अफ़सोस कि पहले बता न पाया, ध्यान ही नहीं रहा! मुलाकात न हो पाए तो कोई बात नहीं, गलती मेरी ही है।

15.4.08

आज की कारस्तानियाँ

आज के दिन मैं नौ दो ग्यारह होने से पहले यह सब करते हुए धरा गया -
  • 00:36 वापस ढकोली में #
  • 06:38 घोड़े खरीदे #
  • 07:01 पानी नहीं #
  • 09:48 चिल्ला चिल्ली #
  • 10:34 हटमल का मल हटाया #
  • 14:20 $BlogItemTitle$ कैसे दिखाएँ? #
  • 14:20 आलू, सोयाबीन, रोटी #
  • 17:45 सब्ज़ी खरीदी #
  • 19:25 सेब पर १०.४.११ चढ़ा रहा हूँ #
  • 21:18 सेब १०.४.११ पूरा होने में १४ मिनट बाकी। #
  • 21:20 प्यास #
यह सेवा पेश की है लाउडट्विटर ने, उनको धन्यवाद।

14.4.08

आज की कारस्तानियाँ

आज के दिन मैं नौ दो ग्यारह होने से पहले यह सब करते हुए धरा गया -
  • 10:09 पूरी, चने, हलुवा, चाँदनी चौक की बड़ी। #
  • 10:12 क्रेज़ी फ़ोर - नहीं देख रहा। #
  • 10:28 आज की हटमल भी हरी करी #
  • 10:39 दो घाट का पानी पी लिया। तीसरी घाट की ओर। #
यह सेवा पेश की है लाउडट्विटर ने, उनको धन्यवाद।

13.4.08

आज की कारस्तानियाँ

आज के दिन मैं नौ दो ग्यारह होने से पहले यह सब करते हुए धरा गया -
  • 22:55 @dchucks :) हाँ अगर तनाव नहीं रहे तो बढ़िया है #
  • 22:56 ढकोली से गुड़गाँव से दिल्ली #
  • 22:57 मूँग की दाल, आइस्क्रीम #
  • 22:58 @cyberbala "upgrade" to a nokia 6233, 6270, 6280 and you'll be able to read twitters in हिन्दी or try the nokia pc suite/iSync #
  • 23:07 कौल ऑन्लाइन ज़िन्दाबाद। #
  • 07:39 @jitu9968 बीऍसऍनऍल ब्रॉडबैण्ड #
  • 07:40 @jitu9968 पीसी मत लो, लैपटॉप लो #
  • 07:41 दिल्ली में दाँत माँजे #
  • 07:41 दिल्ली में फिर दाँत माँजे #
यह सेवा पेश की है लाउडट्विटर ने, उनको धन्यवाद।

12.4.08

आज की कारस्तानियाँ

आज के दिन मैं नौ दो ग्यारह होने से पहले यह सब करते हुए धरा गया -
  • 13:46 सोच रहा हूँ, आराम कि ज़िन्दगी या पैसे और तनाव? #
  • 13:46 भरे पेट को सहला रहा हूँ। #
यह सेवा पेश की है लाउडट्विटर ने, उनको धन्यवाद।