- अभिनव, 16:58
- अभिनव, 18:07
- अभिनव, 19:47
- Cyril Gupta, 20:07
- नूर मोहम्मद खान, 07:57
30.10.07
ब्लॉगवाणी के चरित्र पर कुछ गंभीर बातें
यहाँ पर मैं सिलसिलेवार, पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ। पूरी बात शुरू से बता रहा हूँ क्योंकि यह सार्वजनिक महत्व का विषय है। सार्वजनिक महत्व का विषय क्यों है, वह भी बताऊँगा।
१. चिट्ठाजगत-संकलक की एक नई सुविधा के ऊपर एक लेख छपा।
२. उस पर कुछ टिप्पणियाँ हुईं, वह भी ऐसे व्यक्तियों द्वारा, जो पहले कभी इस तरह की चर्चाओं में शामिल होते दिखे भी नहीं थे। आखिर १००० चिट्टे होने के बाद भी चिट्ठाजगत अभी बहुत बड़ा तो नहीं है। आश्चर्य हुआ कि यह सब लोग कौन हैं, और सभी एक ही राग कैसे अलाप रहे हैं।
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