17.3.04

हाथ कङ्गन को आरसी क्या

पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या। यह कहावत कम से कम इन लोगों पर तो सही बैठती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

सभी टिप्पणियाँ ९-२-११ की टिप्पणी नीति के अधीन होंगी। टिप्पणियों को अन्यत्र पुनः प्रकाशित करने के पहले मूल लेखकों की अनुमति लेनी आवश्यक है।