16.1.05

ई-लेखा

कहते हैं कि ये इनका दूसरा प्रयास है। तो पहला कौन सा था? खुलासा करें। वैसे इन जीवित प्राणी को हम असली दुनिया में पहले ही जानते थे और चिट्ठे की मदद से अब और जानेंगे। स्वागत है मित्र। आशा है जल्द ही भेंट होगी। उम्मीद है कि उँगलियाँ खटखटाते रहेंगे। यानी कि कुञ्जीपटल पर। :)

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

सभी टिप्पणियाँ ९-२-११ की टिप्पणी नीति के अधीन होंगी। टिप्पणियों को अन्यत्र पुनः प्रकाशित करने के पहले मूल लेखकों की अनुमति लेनी आवश्यक है।