11.4.08

ऍचटीऍमऍल, जायज़ और नाजायज़, रबर की पटरियाँ और रबर के प्लेटफ़ार्मों के बारे में चन्द बातें और एक सवाल

पिछले लेख में ऍचटीऍमऍल वैध और अवैध होने की बात लिखी थी तो कुछ लोगों ने इस बारे में और जानना चाहा इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ। थोड़ी रेलगाड़ी वाली भाषा में समझाता हूँ। जिन्हें वैध ऍचटीऍमऍल के बारे में पता है वे तब तक इस लेख के नीचे दिए सवाल का जवाब देने का प्रयास करें।

रेल, पटरी पर चलती है। रेल के अन्दर आप चाहें ठंडे डब्बे बनाएँ, गद्दी वाले बनाएँ, सिर्फ़ कुर्सी वाले बनाएँ, या रसोई बनाएँ। शौचालय बनाएँ या चादर तकिए रखने के लिए गोदाम। आपकी मर्ज़ी है। डिब्बों का रंग लाल पीला नीला जो भी रखें, चाहें तो मालगाड़ी के डब्बे लगाएँ। बस दो बातें आपको याद रखनी ज़रूरी हैं - डब्बे के पहिये पटरी के हिसाब से हों, उनमें बने खाँचे पटरी में बैठ जाएँ। उसे आप नहीं बदल सकते, और दूसरा बिजली के तार से छुआने वाली चिमटी - जो इंजन के ऊपर होती है, वह सही तरह से बैठे। डब्बे के अन्दर, बाहर, जो चाहें करें, पर ऊपर और नीचे इन चीज़ों का खयाल रखना ज़रूरी है।

अब रेल के डब्बे के बदले आप अपने जालस्थल को लें, और पटरी व चिमटी(क्या कहते हैं उसे?) को आप मानक मानें। जालस्थल में आप जो भी चाहें लिखें, दिखाएँ, लिखवाएँ, वह दौड़ेगा जब तक आपकी ऍचटीऍमऍल मानक हो। इस स्थल की ऍचटीऍमऍल - को खोल के देखें - View -> Source कर के। आपको सबसे ऊपर एक पंक्ति दिखेगी -

<!DOCTYPE html PUBLIC "-//W3C//DTD XHTML 1.0 Strict//EN" "http://www.w3.org/TR/xhtml1/DTD/xhtml1-strict.dtd">

यह बताता है कि पटरी कौन सी है।

किसी और स्थल पर आपको दूसरे तरह की पंक्ति दिख सकती है - जैसे

<!DOCTYPE HTML PUBLIC "-//W3C//DTD HTML 4.01 Transitional//EN" "http://www.w3.org/TR/html4/loose.dtd">

यह आपको बताता है कि पटरी कौन सी है - छोटी लाइन या बड़ी लाइन। और भी तरह की होती हैं जैसे ऍचटीऍमऍल ट्रांज़िशनल आदि। सभी पटरियों की सूची आपको यहाँ मिलेगी

इस पंक्ति के बाद ही रेलगाड़ी के डब्बे लगने शुरू होते हैं - <html> से शुरू हो कर। और उन डब्बों का पटरी के अनुरूप होना ज़रूरी है। आखिरी डब्बा होता है </html> ऍचटीऍमऍल रेल से इस तरह थोड़ी अलग है कि यहाँ डब्बों के अन्दर डब्बे होते हैं - जैसे,

<html>
<head>
<title>
शीर्षक
</title>
<body>
और डब्बे और उन डब्बों में बहुत से डब्बे
</body>
</html>

पर आप अपनी मर्ज़ी से डब्बों का नाम नहीं रख सकते, वैध डब्बों का नाम, उसकी डीटीडी यानी डॉक्युमेण्ट टाइप डेफ़िनिशन में होता है। इन सभी पटरियों की माँ है ऍसजीऍमऍल, स्टैण्डर्ड जनरल मार्कप लैंग्वेज। इस के अधीन अलग अलग डीटीडी बना के ऍचटीऍमऍल, डब्लूऍमऍल (वैप फ़ोनों के लिए), और ऍक्सऍमऍल(चिट्ठों की बौछारों के लिए) की पटरियाँ बनाई गई हैं।

इस भाषा में तीन तरह की चीज़ें हैं - डब्बे का नाम, डब्बे की ख़ासियतें और डब्बे के अन्दर का माल।

<a href="http://example.com">उदाहरण</a>

यहाँ पर डब्बे का नाम है a (ऍङ्कर), डब्बे की खासियतें है (खास या ख़ास?) href, और डब्बे के अन्दर का माल है "उदाहरण"।

पटरी का मानक या डीटीडी यह बताता है कि कौन से डब्बे के अन्दर कौन कौन से डब्बे आ सकते हैं, और उनकी क्या क्या खासियतें बताई जा सकती हैं।

किसी पन्ने का ऍचटीऍमऍल सही है या नहीं, यह पता लगाने के लिए एक औज़ार है - वैलिडेटर.डब्लू३.ऑर्ग - इसके अलावा और भी कई औज़ार हैं, जिनसे यह पता लगाया जा सकता है।

अब आपका यही सवाल है न कि ऍचटीऍमऍल मानक न हो तो भी गाड़ी पटरी पर चल कैसे रही थी? चक्कर यह है कि प्लेट्फ़ार्म - यानी ब्राउज़र - और रेलगाड़ियाँ - यानी जालस्थल - पहले बन गए थे, पर पटरियाँ कुछ समय बाद बनीं। इसलिए ये प्लेट्फ़ार्म कंक्रीट के नहीं बने हैं, रबर के हैं, थोड़ी बहुत खींचतान करके भी काम चल जाता है। इतना ही नहीं, प्लेटफ़ॉर्म बनाने वाले ठेकेदार भी अलग अलग हैं - इंटर्नेट ऍक्स्प्लोरर, फ़ायर्फ़ाक्स, सफ़ारी, ऑपेरा और न जाने कितने। सभी को वही गाड़ी अपने प्लेटफ़ार्म पर रुकवानी है तो मानके के हिसाब से रेलगाड़ी को भी चलना होगा और मानक के हिसाब से ही प्लेटफ़ार्म को भी सही आकार देना होगा।

हमें लग सकता है कि ऍचटीऍमऍल अवैध होते हुए भी चल रही थी, पर ज़रा किसी अवैध स्थल को अलग अलग प्लेटफ़ार्मों पर चला के देखिए। वैध ऍचटीऍमऍल सभी पर एक सी दिखेगी, अवैध में थोड़ा फ़र्क दिखेगा। यह भी हो सकता है कि वैध ऍचटीऍमऍल किसी प्लेटफ़ार्म पर ठीक से न दिखे, पर वह अधिकांशतः इसीलिये होता है कि वह प्लेटफ़ार्म ठीक से नहीं बना है। जिस दिन प्लेटफ़ार्म वाले नया उद्धरण ले आएँगे, उस दिन हो सकता है वहाँ गाड़ी की टक्कर होनी शुरू हो जाए।

उम्मीद है इन रबर की पटरियों के बारे में यह जानकारी पर्याप्त होगी। इन प्लेट्फ़ार्मों के अलावा जालस्थलों को मोबाइलों से भी पढ़ा जाता है, और जाल खोजक तथा बौछार खोजक यन्त्र भी इन्हें पढ़ते हैं - वह प्लेट्फ़ार्म से नहीं आते, दूसरी तरफ़ से चढ़ते हैं - पटरी की दूसरी तरफ़ से। पर वांछा उन्हें भी यही होती है कि पटरी के हिसाब से रेलगाड़ी हो।

आशा है अब वैध ऍचटीऍमऍल की आवश्यकता से एक आविष्कार की इच्छा पैदा हो गई होगी। आविष्कार के बारे में आगे। तब तक जाँचिए अपनी रेलगाड़ी को।

अन्ततः एक सवाल - वैलण्टाइन डे पर चूहे ने बिल्ली को क्या कहा?

3 टिप्‍पणियां:

  1. 1. http://validator.w3.org/ का हाइपर लिंक जरा ठीक कर दीजियेगा। अभी वह 404 गलती बता रहा है।
    2. http://validator.w3.org/ हमारे ब्लॉग का HTML फेल हो गया। कुल 640 एरर्स बता रहा है!
    3. वैसे एक जिज्ञासा है - जोहो राइटर (http://writer.zoho.com/) बड़ा जटिल HTML जेनरेट करता है। कई पोस्ट मैं उसके माध्यम से पोस्ट करता हूं। पता नहीं उसकी रेल-पटरी का मानक गेज है या नहीं। कल अगर मानकीकरण हो गया तो हमारी पोस्टें डी-रेल हो जायें!

    उत्तर देंहटाएं
  2. कड़ी ठीक कर दी है, धन्यवाद। आप कहें तो मैं आपकी ऍचटीऍमऍल साफ़ करने का प्रयास कर सकता हूँ।

    उत्तर देंहटाएं

सभी टिप्पणियाँ ९-२-११ की टिप्पणी नीति के अधीन होंगी। टिप्पणियों को अन्यत्र पुनः प्रकाशित करने के पहले मूल लेखकों की अनुमति लेनी आवश्यक है।