17.9.19
क्रोम में हिंदी लेखन की त्रुटि - तारा लगाएँ और समस्या सुलझवाएँ
24.9.13
फ़ेसबुक पन्ने पर अपना लेख तुरंत छापें
अगर आपका कोई फ़ेसबुक पन्ना न हो तो पहले https://www.facebook.com/pages/create/ पर जा के पन्ना बनाएँ।
उसके बाद, https://ifttt.com/recipes/119619 का इस्तेमाल करके अपना लेख इस पन्ने पर अपने आप छापें।
उदाहरण के लिए, यह लेख अपने आप https://www.facebook.com/pages/नौ-दो-ग्यारह/1429539533939152 पर छप जाना चाहिए।
अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
23.9.13
अपना ब्लागर वाले चिट्ठे के लेख तुरंत गूगल+ पर भी छापें
- पहले तो गूगल+ पर अपने चिट्ठे के लिए एक गूगल+ नया पन्ना बनाएँ। यदि आपके पास पहले ही कोई गूगल+ पन्ना हो तो उसका ही इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
- उसके बाद, बफ़र ऐप में एक खाता खोलें। अगर आपके पास पहले ही यहाँ खाता हो, तो उसी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- उसके बाद https://ifttt.com/recipes/119438 - इफ़ दिस देन दैट के इस नुस्खे का इस्तेमाल करें।
22.9.13
ब्लॉगर (ब्लॉग्स्पॉट) के लेख फ़ेसबुक और ट्विटर पर तुरंत कैसे छापें
तरीके कई हैं, उनमें से एक है http://ifttt.com - इफ़ दिस देन दैट - ये हुआ तो वो करो।
इसके दो उदाहरण मैंने यहाँ साझा किए हैं, आजमा के देखें।
बल्कि इस लेख के जरिए मैं इस सुविधा का खुद पहली बार सेवन कर रहा हूँ।
https://ifttt.com/recipes/119325 - इससे यह लेख तुरंत फ़ेसबुक पर छप जाएगा
https://ifttt.com/recipes/119326 - इससे यह लेख तुरंत ट्विटर पर छप जाएगा
आजमा के देखें। अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
11.1.13
गोडैडी पर पाइथन जैंगो, फ़ास्टसीजीआई के साथ
आपके पास
ssh की सुविधा होनी चाहिए। अपने स्थल पर ssh करें। वहाँ पर आपको कुछ ऐसा दिखेगा -cgi चल रही है कि नहीं। उसके लिए ~/cgi/test.cgi बनाएँ -
#!/usr/bin/env python'''This is a comment,If you see this, CGI is not working'''print "Content-type: text/html\n\n"print "Test"उसके बाद, इसे चला के देखें,
http://example.com/cgi/test.cgi के जरिए। example.com के बदले अपना डोमेन दें।यदि आपको पन्ने पर
Test दिखता है तो ठीक है वरना गोडैडी का द्वार खटखटाएँ।इसके बाद, यह सुनिश्चित करें कि आप हमेशा सबसे ताज़े पाइथन का इस्तेमाल करें। अपने
$PATH में देखें कि आपके पास कौन कौन सी पाइथन है, आमतौर पर /usr/bin और /usr/local/bin में आपको ये मिलेंगे।
$ cd /usr/local/bin
$ ls python*
python2.7 python2.7-config
$ cd /usr/bin
$ ls python*
python python2 python2.3 python2.4
हमें
python2.7 का इस्तेमाल करना है। इसके लिए,
$ cd
$ mkdir -p bin
$ cd bin
$ ln -s /usr/local/bin/python2.7 python
$ export PATH=~/bin:$PATH
$ python -V
Python 2.7.3
$ mkdir -p ~/lib/python-packages
$ export PYTHONPATH=~/lib/python-packages:$PYTHONPATH
$PATH और $PYTHONPATH को आप अपनी ~/.profile में डाल सकते हैं ताकि हर बार ये न करना पड़े।अब, किसी भी पाइथन फ़ाइल में आप शुरू में यह दे सकते हैं -
#!/usr/bin/env python
और सही पाइथन का इस्तेमाल होगा।
तो ये हुआ पाइथन। अब आते हैं जैंगो पर। पहले, देखें कि कौना सा जैंगो उतारना है। यह लेख लिखने के समय १.४.३ था। इसे उतारें।
$ cd ~/lib/python-packages
$ wget https://www.djangoproject.com/download/1.4.3/tarball/
$ tar zxvf Django-1.4.3.tar.gz
$ mv Django-1.4.3/django .
फिर, यही काम
flup के लिए करें। यह FastCGI के लिए लगेगा।
$ cd ~/lib/python-packages
$ wget http://pypi.python.org/packages/source/f/flup/flup-1.0.2.tar.gz
$ tar zxvf flup-1.0.2.tar.gz
$ mv flup-1.0.2/flup .
अब जाँच लें।
$ python
>>> import django
>>> import flup
>>>
अपने
$PATH में जैंगो की फ़ाइलें भी डालें।
export PATH=~/lib/python-packages/django/bin:$PATH
इसे भी आप अपनी
.profile में डाल सकते हैं।इसके बाद, एक जैंगो परियोजना बनाएँ।
$ cd
$ django-admin.py startproject mysite
mysite के बदले अपनी इच्छानुसार नाम दें।यह होने के बाद आपको इस प्रकार का ढाँचा मिलेगा -
$ ls -R mysite
mysite:
mysite manage.py
mysite/mysite:
__init__.py settings.py urls.py wsgi.py
इसके बाद, अपनी
~/html में एक dispatch.cgi बनाएँ -
#!/usr/bin/env python
import sys, os
sys.path +=['/absolute/path/to/lib/python-packages']
sys.path +=['/absolute/path/to/mysite']
os.environ['DJANGO_SETTINGS_MODULE'] = 'mysite.settings'
from flup.server.fcgi import WSGIServer
from django.core.handlers.wsgi import WSGIHandler
WSGIServer(WSGIHandler()).run()
mysite के बदले अपना चुना नाम दें।इसके बाद,
$ chmod +x ~/html/dispatch.cgi
$ ~/html/dispatch.cgi
अगर इससे आपको पर्दे पर कुछ हटमल दिखती है, तो समझिए अब तक सब ठीक है।
अब बचा है आँकड़ाकोष का जमाव और अपाची को
्dispatch.cgi की ओर मोड़ना, वह सब अगली बार।आभार, दो साल पुराने इस लेख का और जैंगो ट्यूटोरियल का।
27.12.12
सेब पर पाइथन जैंगो और माईएस्क्यूएल
सबसे पहले तो जैंगो स्थापित करना है, पर उसके पहले... खैर एक एक करके ही निपटाते हैं -
१. सबसे पहले तो
pip चढ़ाए, इसके लिए
curl https://raw.github.com/pypa/pip/master/contrib/get-pip.py
इससे आपके पास
get-pip.py आ जाएगा,२. फिर,
sudo python get-pip.py
इससे
/usr/local/bin में pip और pip-2.7 बन जाएँगे३. अब करें
sudo pip install Django
यह होने के बाद, जाँचें कि जैंगो आ गया है या नहीं
>>> import django
>>> print django.get_version()
1.4.3
>>>
उसके बाद, माईएस्क्यूएल का पाइथन जोड़क उतारना होगा। काफ़ी देर धक्के खाने के बाद,
४. मैकपोर्ट्स के बारे में पता चला। ये कुछ कुछ रेडहैट के आरपीएम या डेबियन के एप्ट-गेट जैसा है।
यहाँ से माउंटेन लायन का पीकेजी उतार के स्थापित किया। इससे
port स्थापित हुआ, /opt/local/bin/port में।५. अब
py27-mysql उतारा -
sudo port install my27-mysql
यही अभी चल रहा है, इसके निपटने के बाद देखना है कि सब कुछ चलता भी है या नहीं!
६. एक घंटे बाद : नहीं, इससे कुछ नहीं हुआ, फिर इसे आजमाया -
export PATH=$PATH:/opt/local/lib/mysql5/bin
export DYLD_LIBRARY_PATH=/usr/local/mysql/lib/
export ARCHFLAGS='-arch i386 -arch x86_64'
sudo easy_install MySQL-python
अब, /Library/Python/2.7/site-packages में MySQL_python-1.2.4c1-py2.7-macosx-10.8-intel.egg मौजूद है।७. जाँच करें कि
MySQLdb है या नहीं -
>>> import MySQLdb
>>>
अब डाटाबेस से जुड़ के देखना है कि क्या होता है। आज के लिए बहुत हुआ, अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
सेब पर विम के जरिए पाइथन पर काम
19.12.12
स्पाइसजेट के सबसे सस्ते टिकट फ़ोन पर मिलेंगे, जाल पर नहीं
ताज़ी खबर यह है (और ताज़ी यानी १९ दिसंबर २०१२ की) कि अगर आपको हवाई जहाज़ के टिकट लेने हों, और स्पाइसजेट में जाने की इच्छा हो, तो सीधे स्पाइसजेट वालों को फ़ोन कर के टिकट बुक करें।
ये है गणित, उदाहरण समेत।
मुझे पुणे से दिल्ली का टिकट लेना था, और उसके लिए मैंने यह कदम उठाए -
- यात्रा.कॉम पर गया। टिकट का दाम था रु ५,५२२, उपर से १२५ रुपए और। कुल दाम हुआ ५६४७, और टिकट रद्द करने पर १३०० रुपए कटते हैं
- मेक माई ट्रिप पर गया, वहाँ भी वही हाल, टिकट रद्द करने पर १३०० रुपए कटते हैं।
- फिर स्पाइसजेट के स्थल पर गया, वहाँ दाम तो वही था, पर टिकट रद्द करने का खर्चा नहीं पता चला, तो फ़ोन किया। नंबर स्थल पर ही हैं। पता चला कि १००० रुपए कटेंगे। और यह भी पता चला कि फ़ोन से बुक करने पर रियायत है। कुल खर्चा सिर्फ़ ५२९७, यानी ३५० रुपए कम, ६% का फ़ायदा।
- पहले स्थल पर देख लें कि कौन सा टिकट लेना है
- फिर स्थल पर ही मौजूद फ़ोन नंबर पर बात करके बुकिंग करें
- आप केवल क्रेडिट कार्ड से पैसे दे सकते हैं, और उसके लिए आईओटीपी (एक खास कूटशब्द) लगेगा जो फ़ोन द्वारा समोसा भेज के पाया जा सकता है
- यदि आपके पास आईओटीपी न हो या क्रेडिट कार्ड न हो तो भी आप फ़ोन पर होल्ड पिन ले सकते हैं, और उसके बाद स्थल पर जा के नेट बैंकिंग से भुगतान कर सकते हैं
| ज़रिया | खर्चा | रद्द करने का खर्चा | विवरण |
| यात्रा | ५६४७ | १३०० | ५५२२ + १२५ शुल्क |
| मेकमाईट्रिप | ५६४७ | १२५० | ५५२२+१२५ शुल्क |
| स्पाइसजेट का स्थल | ५६४७ | १००० | ५५२२+१२५ शुल्क |
| स्पाइसजेट फ़ोन + भुगतान स्पाइसजेट के स्थल से क्रेडिट कार्ड द्वारा | ५४२२ | १००० | बेस फ़ेयर में २०% कम + १२५ शुल्क |
| स्पाइसजेट फ़ोन + भुगतान स्पाइसजेट के स्थल से नेट बैंकिंग द्वारा | ५२९७ | १००० | बेस फ़ेयर में २०% कम और कोई शुल्क नहीं, पर क्रेडिट कार्ड की उधारी सुविधा नहीं |
| स्पाइसजेट फ़ोन + भुगतान फ़ोन पर ही क्रेडिट कार्ड द्वारा | ५२९७ | १००० | बेस फ़ेयर में २०% कम और कोई शुल्क नहीं, क्रेडिट कार्ड की उधारी सुविधा अलग |
17.12.12
देवनागरी.नेट दिखने के बजाय उतर रहा है
एक नए सेब पर काम कर रहा हूँ, और इसमें सी कंपाइलर डालने के लिए एक्सकोड लगता है जो कि खुद अपने आप में डेढ़ जीबी का दैत्य है।
देर सबेर एक लिनक्स लगाना ही पड़ेगा। तब तक के लिए होता हूँ नौ दो ग्यारह।
13.12.12
19.1.10
गूगल आयो - में जायो?
अब सवाल यह है कि गूगल आयो में जायो कि नहीं।
पंजीकरण का खर्चा है २०,००० रुपए, और हो रहा है यह हो रहा है सैन फ़्रांसिस्को में, यानी आने जाने और रहने का खर्चा अलग।
सोचना पड़ेगा। वह भी १६ अप्रैल के पहले। इसलिए अब होते हैं नौ दो ग्यारह।
18.1.10
बीएसएनएल के एक ब्रॉडबैंड से कई कंप्यूटर / लैपटॉप जोड़ें
पिछले ७ दिनों से मैं ऑन्लाइन गरीबी रेखा के नीचे लोट रहा था।
हुआ क्या था?
शक तो यह है कि किसी महानुभाव ने मेरे खाते का कूटशब्द बदल दिया था - पर यह सिर्फ़ शक ही है। खैर सब कुछ कर करा के काम शुरू तो हो गया लेकिन बेतार वाला काम फिर भी चालू नहीं हो रहा था। आज जा के सब कुछ ठीक हुआ है तो यह है कुछ जानकारी, शायद किसी और के काम भी आए, निश्चित रूप से मेरे काम तो आएगी ही।
यह सब बीएसएनएल के ब्रॉडबैंड और WA3002G4 मॉडॅम के निर्देश हैं।
- मॉडम चालू कर दें और तार से कंप्यूटर को जोड़ दें।
- अब http://192.168.1.1 पर जाएँ, ब्राउज़र के जरिए
- यहाँ पर कूटशब्द माँगा जाएगा, जो आमतौर पर प्रयोक्ता नाम ही होता है। इसे बदल देना चाहिए - सुरक्षा की दृष्टि से। खैर आगे बढ़ेंगे तो आपको ऐसा कुछ दिखेगा -
- इसके बाद,
Advanced Setup | WANमें जा के पहली कतार केEditपर चटका लगाएँ। - यहाँ पर दें -
- वीपीआई - ०
- वीसीआई - ३५
- एनेबल वीलॅन टॅगिंग - खाली छोड़ें
- सर्विस कैटेगरी - यूबीआर विदाउट पीसीआर
और आगे बढ़ें।
- अब, अगले पन्ने पर यह जानकारी दें -
- कनेक्शन टाइप - पीपीपीओई
- एन्कैप्सुलेशन मोड - एलएलसी/स्नैप-ब्रिजिंग
और फिर आगे बढ़ें।
- अगले पन्ने पर यह जानकारी दें -
- पीपीपी यूज़रनेम - अपना बीएसएऩएल प्रयोक्ता नाम डालें - बिना @bsnl.in के केवल अगला हिस्सा
- पीपीपी पासवर्ड - अपना बीएसएनएल कूटशब्द डालें - ध्यान दें, आपको अपने राउटर का कूटशब्द भी बदल के रखना चाहिए वरना अगर किसी के हाथ राउटर लग गया तो उसके पास आपका बीएसएनएल कूटशब्द भी है!
- ऑथेंटिकेशन मेथड - में
AUTOरखें। - बाकी सब खाली छोड़ दें।
फिर आगे बढ़ें।
- अगले पन्ने पर,
- एनेबल नैट - पर सही का निशान लगाएँ
- एनेबल फ़ायरवाल - पर सही का निशान लगाएँ
- एनेबल आईजीएमपी मल्टीकास्ट - पर सही का निशान लगाएँ
- एनेबल वैन सर्विस - पर सही का निशान लगाएँ
- सर्विस नेम -
pppoe_0_35_1- या कुछ भी और चाहें तो रख सकते हैं।
यह करने के बाद जमाव सँजो लें।
- अब अपने मॉडेम को रिबूट कर लें - यह ब्राउज़र से किया जा सकता है। बाईं पट्टी में अंतिम विकल्प यही है।
- अगर आप विंडोज़ एक्स पी पर हैं तो अपनी मशीन पर "शो ऑल कनेक्शंस" कर के लैन और ब्रिज को एक साथ चुनें (कंट्रोल दबाए रखें और दोनों पर एक एक कर के चटका लगाएँ। फिर दाँया चटका मार के ब्रिज का विकल्प चुनें। और फिर मशीन को भी रिबूट कर डालें। अगर आप सेब पर हैं तो यह सब करने की ज़रूरत नहीं है।
बस हो गया! अब, जब आपका मॉडम फिर से चालू होगा तो उसमें चार बत्तियाँ जलेंगी - एक लाल - बाईं तरफ़ - पॉवर की, फिर नारंगी-पीली - एडीएसएल सिग्नल की, फिर तीसरी हरी - इंटर्नेट की (यह आपका कूटशब्द इस्तेमाल करके जुड़ेगा और फिर हरा होगा) और आखिरी लैन की। और आप किसी भी कंप्यूटर के जरिए बेतार से इससे जुड़ सकते हैं। मॉडम चालू होने के ३-४ सेकिंड बाद वह खुद ही जाल से जुड़ जाएगा और अन्य कंप्यूटरों को अपने आप ही 192.168.1.* के तहत आईपी भी पकड़ा देगा।
उम्मीद है दाल चावल अगल कर लेंगे। कोई दिक्कत हो तो टिपियाएँ।
हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
6.12.09
ओर्कुट का नया रूप
15.11.09
सेब पर मलयालम
पहले कुछ इतिहास। सेब का इस्तेमाल करने वालों को अमूमन बंगाली, मलयालम, कन्नड़ अक्षरों के बजाय डब्बे ही दिखते हैं - कम से कम सेब १०.४ तक तो। आइए देखते हैं मुद्रलिपियों का कुछ इतिहास -
- मुद्रलिपियों की दुनिया में ट्रू-टाइप (टीटीऍफ़) का विकास सेब वालों ने किया था। इसे इस्तेमाल करने की इजाज़त माइक्रोसॉफ़्ट - विंडोज़ वालों - ने भी सेब वालों से ली।
- टाइप १ (पोस्ट स्क्रिप्ट) प्रारूप की मुद्रलिपियों का विकास अडोब बालों ने किया (वही पीडीएफ़ पाठक वाले)।
नतीजा यह हुआ कि माइक्रोसॉफ़्ट और अडोब ने पहले अलग अलग और फिर मिल के अपनी तकनीक को प्रोत्साहन दिया, उसे ट्रूटाइप ओपन - या ओपन टाइप कहा जाता था। आज की तारीख में आप जो रघु, मंगल, संस्कृत २००३, सुरेख आदि मुद्रलिपियों का इस्तेमाल करते हैं वे ओपन टाइप ही हैं। ये या तो .टीटीएफ़ होती हैं या .ओटीएफ़।
कुछ समय बाद माइक्रोसॉफ़्ट और अडोब ने ओपन टाइप को खुला मानक बनाने की पहल की - यानी केवल वे दो ही नहीं अपितु कोई भी उस मानक के आधार पर मुद्रलिपि बना सकता है और मान के आधार पर कोई भी संगठन मुद्रलिपि पर सही की मोहर लगा सकता है - इसके लिए केवल इन दो कंपनियों का मोहताज रहने की ज़रूरत नहीं।
नतीजा यह कि ओपनटाइप मुद्रलिपियों की बाढ़ सी आ गई। ध्यान दें कि केवल देवनागरी ही नहीं बल्कि रोमन में भी कई बेहतर किस्म के संयुक्ताक्षर - जैसे कि हस्तलेखन वाली मुद्रलिपियाँ - ओपनटाइप के जरिए बनाई जा सकती हैं।
लेकिन अब सेब वाले कहाँ रह गए? भई उनकी तकनीक तो उन्नत थी ही - शायद अब भी ओपनटाइप से बेहतर हो - जीएक्स टाइपोग्राफ़ी - जिसकी मालिकियत सेब के पास थी - अब तक एएटी - एप्पल एड्वांस्ड टाइपोग्राफ़ी - बन चुकी थी, और यह भी देवनागरी, अरबी संयुक्ताक्षर आदि प्रदर्शित करने की क्षमता रखती थी -लेकिन अब दो "मानक" हो गए - एक सेब का अपना - जो सिर्फ़ सेब पर ही चलता - और दूसरा ओपन टाइप - जिसका मुक्त मानक था, यह विंडोज़, लिनक्स आदि पर बखूबी चल रहा था।
यानी, जब तक आपके पास सेब के लिए एएटी वाली मुद्रलिपि न हो आपको देवनागरी/अरबी /मलयालम ठीक से नहीं दिखेगी।
इतिहास का पाठ समाप्त हुआ, अब वर्तमान में आते हैं।
अब अगर आपकी न सेब में दिलचस्पी हो और न ही मलयालम में फिर भी यह जानकारी काम की है।
काम की इसलिए कि मॅकमलयालम वालों ने विंडोज़ व लिनक्स पर चलने वाली ओपनटाइप मुद्रलिपियों को सेब पर चलाने के लिए परिवर्तित करने में सफलता पाई है।
इसीलिए तो लिनक्स और विंडोज़ वाली मलयालम मुद्रलिपियों में से एक, रचना मलयालम, अब सेब की आत्सुई (एटीएसयूई) - ऍप्प्ल टाइपोग्राफ़ी सर्विसेज़ फॉर यूनिकोड इमेजिंग में भी उपलब्ध है।
अर्थात् सरल शब्दों में - देवनागरी की यूनिकोडित मुद्रलिपियों को सेब में इस्तेमाल करने के लिए रास्ता साफ़ है। अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
अगर आपके पास सेब है और मलयालम में भी दिलचस्पी है तो मॅकमलयालम का आनंद उठाएँ। अगर आप अपने विचरक की मलयालम जाँचना चाहें तो विकिपीडिया या ट्विटर के मलयालम हिस्सों को देख कर जाँचें।
कुछ भविष्य के बारे में।
सेब वाले भी अब धीरे धीरे ओपनटाइप को अपना रहे हैं। सेब १०.५ में अरबी प्रदर्शन के लिए ओपन टाइप मुद्रलिपियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। संभव है कि सेब वाले कुछ मामलों में सीधे ओपन टाइप का ही इस्तेमाल करना पसंद करें - क्योंकि यह अब पका पकाया माल है, और इतनी सारी मुद्रलिपियाँ ओपन टाइप की पहले ही हैं।
दूसरी बात यह - जो वर्तमान के संदर्भ में कही - ओपन टाइप मुद्रलिपियों को एएटी में परिवर्तित करने का मार्ग प्रशस्त है - जैसे कि इस मलयालम मुद्रलिपि में। इसका भी लाभ सेब के प्रयोक्ता उठा पाएँगे।
सीख यह - उन्नत तकनीक पैदा करो, और फिर सही समय तक कमाई करने के बाद - दुह लेने के बाद उसे मानक बनने के लिए खुला छोड़ दो। नहीं छोड़ोगे तो कोई और बाजी मार ले सकता है। हमारी भारत सरकार ने इस्की के जरिए एक-बाइटीय उन्नत मुद्रलिपियाँ तो पैदा कीं, लेकिन उसे मुक्त मानक न बनाया - इससे भारतीय भाषाओं का संगणन आराम से १०-१५ साल पीछे हो गया - जब तक यूनिकोड न आया तब तक हमें अपने बिल में छिपा ही रहना पड़ा - पर चुगे हुए खेत का रोना न रोते हुए हम नौ दो ग्यारह होते हैं।
22.10.09
विकिस्रोत वालों की पीडीएफ़ में पंगे
विकिपीडिया वालों का ही प्रकल्प है विकिस्रोत - जहाँ पर आप किसी भी किताब का स्रोत - यानी मसाला - डाल सकते हैं और फिर उसे पीडीएफ़ या ओपनऑफ़िस प्रारूप में उतार सकते हैं।
उनके पीडीएफ़ बनाने वाले तंत्रांश में देवनागरी संयुक्ताक्षर ठीक से नहीं बनते हैं। इसका ब्यौरा दिया था, अब शायद ठीक करने का काम शुरू हो गया है।
पंगा mwlib नाम की लाइब्रेरी में है।
बढ़िया है। आशा है यह त्रुटि शीघ्र ही नौ दो ग्यारह होगी।
1.10.09
गूगल ऐप इंजन का मुख पृष्ठ हिन्दी में
15.8.09
12.8.09
ब्लैकबेरी में हिन्दी नहीं, काला बेर बना काला पत्थर
अपने अन्नदाता ने कुछ रोज़ पहले एक ब्लैकबेरी प्रदान किया है। काफ़ी दिलचस्प चीज़ है, जिसे दफ़्तर में काम नहीं करना सिर्फ़ चौधराहट ही दिखानी है उसके लिए दफ़्तर से कम नहीं है। लेकिन इसमें एक ही दिक्कत है - फ़ोन में हिन्दी प्रदर्शन के एवज में सिर्फ़ काले डब्बे दिखते हैं! इस लिहाज़ से देखा जाए तो आपने लिए यह काला बेर काले पत्थर के बराबर ही है।
चुनांचे मैं अपना नोकिया २६२६ भी रखा हुआ है ताकि चलते फ़िरते कतारों में खड़े शौक फ़रमाया जा सके। क्या करें, कुछ नवाबों को लौंडो का शौक होता है, और मेरे जैसे कुछ नाचीज़ किस्म के लोगों को कारखानों में बने सामान पर खड़खड़ाने का। देखा कि करुण वासुदेव कुछ खोजबीन कर रहे हैं इस बारे में। उम्मीद है नतीज़ा जल्द आएगा।
6.8.09
यूट्यूब अब हिन्दी में
ताज़ी खबर है कि गूगल का यूट्यूब अब हिन्दी में भी है।
उदाहरण के लिए, चंडीगढ़ से संबंधित वीडियो पाने के लिए आप जब यूट्यूब पर चंडीगढ़ की खोज करेंगे, तो आपको परिणाम हिन्दी में दिखेंगे -
अगर आपको यूट्यूब हिन्दी में न दिख रहा हो तो यूट्यूब के पते के आगे "?hl=hi" लगा दें, ऐसे:
http://youtube.com?hl=hi
तो देखिए मस्त गाना यूट्यूब पर, हम होते हैं नौ दो ग्यारह!
27.7.09
अहा, जियोसिटीज़, और लिनक्स परिचय, और ब्लॉगर
जियोसिटीज़ वालों से संदेसा आया कि बंद होने वाला है। जो इसके बारे में नहीं जानते हैं बस इतना ही समझ लें कि यह अपने ज़माने का ब्लॉग्स्पॉट था। अंतर्जाल पर मेरा सबसे पहला स्थल जियोसिटीज़ पर ही था।
बंद तो होने वाला है, साथ ही कुछ दिन पहले रवि रतलामी जी ने अपनी लिनक्स की किताब के संबंध में लिनक्स परिचय के बारे में पूछा तो ध्यान आया कि यह भी तो जियोसिटीज़ पर ही है। इसे भी सितंबर २००९ के पहले कहीं और सरकाना होगा।
वैसे लिनक्स परिचय एक स्वयंसेवी अनुवाद कार्यक्रम है, आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं। आज के दिन यह पन्ना पूर्ण किया, काफ़ी समय से आधा अनुवादित था। अनुवाद संबंधी त्रुटियाँ अवश्य जानकारी में लाएँ, अग्रिम आभाऱ।
वैसे सोचता हूँ कि जियोसिटीज़ ऑर ब्लॉग्स्पॉट में एक वाक्य में फ़र्क बताना हो तो कैसे बताएँ? शायद ऐसे, कि जियोसिटीज़ में आदान प्रदान की इकाई एक फ़ाइल थी, जबकि ब्लॉगर में यह इकाई एक लेख है।
अब हम होते हैं नौ दे ग्यारह, आज की असली दुनिया में घुसने से पहले तलवारें पैनी करनी हैं।