3.11.05

इण्डियाप्रेस - इंस्क्रिप्ट कुञ्जीपटल

इस यूनिकोड ने समस्याएँ भी कम नहीं खड़ी की हैं। अब, पहले इ की मात्रा लगा के उसके बाद व्यञ्जन छापना एक आम आदत है, ग़लती नहीं कहूँगा क्योंकि यह तो स्वाभाविक ही है। सम्पादन तन्त्रों में इतनी अकल होनी चाहिए कि बिना व्यञ्जन के मात्रा न छापने दें, और एक व्यञ्जन के ऊपर एक से अधिक मात्रा न लगने दें, और हलन्त के बाद मात्रा न लगने दें। अक्षरों को प्रदर्शित टुकड़ों के आधार पर विभाजित करना बहुत अच्छा काम नहीं है - इससे बेहतर होता कि मूल व्यञ्जन हलन्त वाले बनाते और उसके बाद स्वर आने पर हलन्त गायब किया जाता। बहरहाल, जो है सो है। और ये इंस्क्रिप्ट कुञ्जीपटल बढ़िया है, साइबरकैफ़े आदि में काम करने के लिए। ऊपर दिए वर्णन में मात्राओं की स्थिति सही नहीं है, लेकिन कुञ्जीपटल तो सही चल रहा है।

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